🚚 Free Worldwide Shipping on All Orders!Shop Now
Product image 1
HomeStore

अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ का इतिहास

अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ का इतिहास

Book Details

  • Author: डॉ. व्रजकुमार पांडेय, डॉ. दीपक कुमार राये

  • Edition: फरवरी 2018

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 9788170072720

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक प्रगतिशील लेखक संघ की ऐतिहासिक भूमिका और वैचारिक योगदान का समग्र अध्ययन प्रस्तुत करती है। लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि वर्ष 1936 में स्थापना के बाद से प्रगतिशील लेखक संघ ने केवल एक साहित्यिक संगठन के रूप में ही नहीं, बल्कि अपने समय की समग्र चेतना और विचारधारा को आकार देने वाली एक प्रभावशाली सांस्कृतिक शक्ति के रूप में कार्य किया है।

पुस्तक में यह विश्लेषण किया गया है कि किस प्रकार प्रगतिशील लेखक संघ ने साहित्य, संस्कृति और विभिन्न कला रूपों को सामाजिक यथार्थ, जनसंघर्ष और प्रगतिशील मूल्यों से जोड़ा। लेखक यह भी दर्शाते हैं कि संघ ने अपने समय के सवालों—जैसे सामाजिक असमानता, शोषण, साम्प्रदायिकता और लोकतांत्रिक चेतना—को साहित्य और कला के माध्यम से व्यापक रूप में प्रसारित और विस्तारित किया।

यह कृति हिंदी साहित्य, सांस्कृतिक अध्ययन, प्रगतिशील आंदोलन और भारतीय बौद्धिक इतिहास में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। ऐतिहासिक दृष्टि और वैचारिक विश्लेषण के साथ प्रस्तुत यह पुस्तक प्रगतिशील लेखक संघ की भूमिका को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।



$0.96

Original: $3.20

-70%
अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ का इतिहास

$3.20

$0.96

Product Information

Shipping & Returns

Description

Book Details

  • Author: डॉ. व्रजकुमार पांडेय, डॉ. दीपक कुमार राये

  • Edition: फरवरी 2018

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 9788170072720

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक प्रगतिशील लेखक संघ की ऐतिहासिक भूमिका और वैचारिक योगदान का समग्र अध्ययन प्रस्तुत करती है। लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि वर्ष 1936 में स्थापना के बाद से प्रगतिशील लेखक संघ ने केवल एक साहित्यिक संगठन के रूप में ही नहीं, बल्कि अपने समय की समग्र चेतना और विचारधारा को आकार देने वाली एक प्रभावशाली सांस्कृतिक शक्ति के रूप में कार्य किया है।

पुस्तक में यह विश्लेषण किया गया है कि किस प्रकार प्रगतिशील लेखक संघ ने साहित्य, संस्कृति और विभिन्न कला रूपों को सामाजिक यथार्थ, जनसंघर्ष और प्रगतिशील मूल्यों से जोड़ा। लेखक यह भी दर्शाते हैं कि संघ ने अपने समय के सवालों—जैसे सामाजिक असमानता, शोषण, साम्प्रदायिकता और लोकतांत्रिक चेतना—को साहित्य और कला के माध्यम से व्यापक रूप में प्रसारित और विस्तारित किया।

यह कृति हिंदी साहित्य, सांस्कृतिक अध्ययन, प्रगतिशील आंदोलन और भारतीय बौद्धिक इतिहास में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। ऐतिहासिक दृष्टि और वैचारिक विश्लेषण के साथ प्रस्तुत यह पुस्तक प्रगतिशील लेखक संघ की भूमिका को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।