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अष्टाङ्गहृदय (सम्पूर्ण) Original | Ashtanga Hrdayam Sampooran | Shivshakti Vyakhya | Author Omprakash Saxena Nidar & Bharti Agarwal

अष्टाङ्गहृदय (सम्पूर्ण) Original | Ashtanga Hrdayam Sampooran | Shivshakti Vyakhya | Author Omprakash Saxena Nidar & Bharti Agarwal

Author: Omprakash Saxena Nidar

Brand: Generic

Edition: First Edition

Binding: hardcover

Number Of Pages: 791

Release Date: 30-11-2025

Details: जो मनुष्य दीर्घायु एवं स्वास्थ्य की कामना करते हैं, उन्हें आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त करना तथा उसके उपदेशों का पालन करना अत्यावश्यक है: क्योंकि आयु- सम्बन्धी सम्पूर्ण ज्ञान आयुर्वेद का विषय है। वर्तमान समय में आयुर्वेद पर अनेक ग्रन्थ उपलब्ध हैं, उनमें से एक है- आचार्य वाग्भट रचित अष्टांगहृदय।
आयुर्वेद आठ अंगों में विभाजित है। प्रत्येक अंग पर अनेक ग्रन्थ होते हुए भी सभी प्रकार की व्याधियों के उपचार के लिए किसी एक ग्रन्थ की असमर्थता को देखकर आचार्य वाग्भट ने सभी अंगों के सारसाय अष्टांग-संग्रह की रचना की। अष्टांग-संग्रह ग्रन्थ की विशालता के कारण तथा अत्यन्त कठिनाई से समझ में आने वाला होने के कारण आचार्य वाग्भट ने अष्टांगहृदय की रचना की। शीघ्र ही अष्टांगहृदय सम्पूर्ण भारत में विख्यात हो गया। अष्टांगहृदय का भारतवर्ष की प्रायः सभी मुख्य भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

Package Dimensions: 9.1 x 7.9 x 0.8 inches

Languages: Hindi

$9.59
अष्टाङ्गहृदय (सम्पूर्ण) Original | Ashtanga Hrdayam Sampooran | Shivshakti Vyakhya | Author Omprakash Saxena Nidar & Bharti Agarwal
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Product Information

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Description

Author: Omprakash Saxena Nidar

Brand: Generic

Edition: First Edition

Binding: hardcover

Number Of Pages: 791

Release Date: 30-11-2025

Details: जो मनुष्य दीर्घायु एवं स्वास्थ्य की कामना करते हैं, उन्हें आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त करना तथा उसके उपदेशों का पालन करना अत्यावश्यक है: क्योंकि आयु- सम्बन्धी सम्पूर्ण ज्ञान आयुर्वेद का विषय है। वर्तमान समय में आयुर्वेद पर अनेक ग्रन्थ उपलब्ध हैं, उनमें से एक है- आचार्य वाग्भट रचित अष्टांगहृदय।
आयुर्वेद आठ अंगों में विभाजित है। प्रत्येक अंग पर अनेक ग्रन्थ होते हुए भी सभी प्रकार की व्याधियों के उपचार के लिए किसी एक ग्रन्थ की असमर्थता को देखकर आचार्य वाग्भट ने सभी अंगों के सारसाय अष्टांग-संग्रह की रचना की। अष्टांग-संग्रह ग्रन्थ की विशालता के कारण तथा अत्यन्त कठिनाई से समझ में आने वाला होने के कारण आचार्य वाग्भट ने अष्टांगहृदय की रचना की। शीघ्र ही अष्टांगहृदय सम्पूर्ण भारत में विख्यात हो गया। अष्टांगहृदय का भारतवर्ष की प्रायः सभी मुख्य भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

Package Dimensions: 9.1 x 7.9 x 0.8 inches

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