
भारत की परिकल्पना का विकास
Book Details
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Author: प्रो. इरफ़ान हबीब
-
Edition: फरवरी 2018
-
Cover: Paperback
-
Multiple Book Set: No
About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफ़ान हबीब के ऐतिहासिक और वैचारिक लेखन को प्रस्तुत करने वाली एक महत्वपूर्ण कृति है। लेखक ने अपने विश्लेषण में भारतीय इतिहास को वैज्ञानिक, तथ्यपरक और आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देखने पर बल दिया है। उनकी लेखनी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं को व्यापक ऐतिहासिक संदर्भों में समझने में सहायक सिद्ध होती है।
पुस्तक में इतिहास लेखन की पद्धति, वर्ग संबंधों, उत्पादन व्यवस्था और सामाजिक संरचना जैसे मुद्दों पर गंभीर विमर्श किया गया है। प्रो. हबीब का लेखन ऐतिहासिक तथ्यों के साथ-साथ उनके सामाजिक अर्थों को भी स्पष्ट करता है, जिससे पाठक भारतीय इतिहास की जटिलताओं को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
यह कृति इतिहास, समाजशास्त्र और राजनीतिक अध्ययन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और जागरूक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। स्पष्ट भाषा, गहन विश्लेषण और अकादमिक विश्वसनीयता के कारण यह पुस्तक भारतीय इतिहास के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में मानी जाती है।
Original: $0.21
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Description
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Author: प्रो. इरफ़ान हबीब
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Edition: फरवरी 2018
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Cover: Paperback
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Multiple Book Set: No
About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफ़ान हबीब के ऐतिहासिक और वैचारिक लेखन को प्रस्तुत करने वाली एक महत्वपूर्ण कृति है। लेखक ने अपने विश्लेषण में भारतीय इतिहास को वैज्ञानिक, तथ्यपरक और आलोचनात्मक दृष्टिकोण से देखने पर बल दिया है। उनकी लेखनी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं को व्यापक ऐतिहासिक संदर्भों में समझने में सहायक सिद्ध होती है।
पुस्तक में इतिहास लेखन की पद्धति, वर्ग संबंधों, उत्पादन व्यवस्था और सामाजिक संरचना जैसे मुद्दों पर गंभीर विमर्श किया गया है। प्रो. हबीब का लेखन ऐतिहासिक तथ्यों के साथ-साथ उनके सामाजिक अर्थों को भी स्पष्ट करता है, जिससे पाठक भारतीय इतिहास की जटिलताओं को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
यह कृति इतिहास, समाजशास्त्र और राजनीतिक अध्ययन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और जागरूक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। स्पष्ट भाषा, गहन विश्लेषण और अकादमिक विश्वसनीयता के कारण यह पुस्तक भारतीय इतिहास के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में मानी जाती है।












