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भारत में राज्य की उत्पति

भारत में राज्य की उत्पति

Book Details

  • Author: राम शरण शर्मा

  • Edition: 2013

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 8170071437

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात इतिहासकार राम शरण शर्मा द्वारा दिए गए द्वितीय कोसांबी स्मारक व्याख्यान पर आधारित एक महत्वपूर्ण कृति है। लेखक के लिए यह विशेष सम्मान और सौभाग्य की बात रही कि उन्हें मुंबई विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा यह प्रतिष्ठित व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया। इस व्याख्यान के माध्यम से उन्होंने महान विद्वान दामोदर धर्मानंद कोसांबी के बौद्धिक योगदान को स्मरण किया है।

पुस्तक में कोसांबी की उस दुर्लभ प्रज्ञा और विद्वत्ता पर प्रकाश डाला गया है, जिसके बल पर उन्होंने ज्ञान और विज्ञान की विभिन्न धाराओं में गहन अवगाहन किया। लेखक यह दर्शाते हैं कि किस प्रकार कोसांबी ने इतिहास लेखन को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक विश्लेषण और बहुविषयक अध्ययन से समृद्ध किया।

यह कृति भारतीय इतिहास लेखन, बौद्धिक परंपराओं और आधुनिक historiography में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। वैचारिक स्पष्टता और अकादमिक गहराई के साथ प्रस्तुत यह पुस्तक दामोदर धर्मानंद कोसांबी के विचारों और उनके ऐतिहासिक महत्व को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में देखी जाती है।



$0.16

Original: $0.53

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  • Author: राम शरण शर्मा

  • Edition: 2013

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 8170071437

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात इतिहासकार राम शरण शर्मा द्वारा दिए गए द्वितीय कोसांबी स्मारक व्याख्यान पर आधारित एक महत्वपूर्ण कृति है। लेखक के लिए यह विशेष सम्मान और सौभाग्य की बात रही कि उन्हें मुंबई विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा यह प्रतिष्ठित व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया। इस व्याख्यान के माध्यम से उन्होंने महान विद्वान दामोदर धर्मानंद कोसांबी के बौद्धिक योगदान को स्मरण किया है।

पुस्तक में कोसांबी की उस दुर्लभ प्रज्ञा और विद्वत्ता पर प्रकाश डाला गया है, जिसके बल पर उन्होंने ज्ञान और विज्ञान की विभिन्न धाराओं में गहन अवगाहन किया। लेखक यह दर्शाते हैं कि किस प्रकार कोसांबी ने इतिहास लेखन को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक विश्लेषण और बहुविषयक अध्ययन से समृद्ध किया।

यह कृति भारतीय इतिहास लेखन, बौद्धिक परंपराओं और आधुनिक historiography में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। वैचारिक स्पष्टता और अकादमिक गहराई के साथ प्रस्तुत यह पुस्तक दामोदर धर्मानंद कोसांबी के विचारों और उनके ऐतिहासिक महत्व को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में देखी जाती है।