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भारतीय विवाह संस्था का इतिहास

भारतीय विवाह संस्था का इतिहास

Book Details

  • Author: काशीनाथ विश्वनाथ राजवाड़े

  • Edition: मार्च 2024

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 8170070406

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक “भारतीय विवाह संस्था का इतिहास” का तीसरा संस्करण है, जो भारतीय समाज की विवाह व्यवस्था के विकास को ऐतिहासिक दृष्टि से प्रस्तुत करता है। लेखक काशीनाथ विश्वनाथ राजवाड़े ने इस कृति में आदिम समाज से लेकर विकसित सामाजिक संरचनाओं तक विवाह संस्था के क्रमिक विकास का गहन और वैज्ञानिक विश्लेषण किया है।

पुस्तिका इतिहासचर्या के प्रति लेखक के व्यापक अध्ययन और चिंतन की एक अनूठी उपलब्धि मानी जाती है। इसमें सामाजिक परंपराओं, रीति–रिवाजों और संस्थागत परिवर्तनों को शोधपरक दृष्टिकोण से समझाया गया है, जिससे पाठक भारतीय समाज के ऐतिहासिक विकास को गहराई से समझ पाते हैं।

यह कृति इतिहास, समाजशास्त्र, मानवशास्त्र और भारतीय सामाजिक संस्थाओं में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए अत्यंत उपयोगी है। तथ्यपरक विश्लेषण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण यह पुस्तक भारतीय विवाह संस्था के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में स्थापित होती है।

$0.54

Original: $1.81

-70%
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  • Author: काशीनाथ विश्वनाथ राजवाड़े

  • Edition: मार्च 2024

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 8170070406

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यह पुस्तक “भारतीय विवाह संस्था का इतिहास” का तीसरा संस्करण है, जो भारतीय समाज की विवाह व्यवस्था के विकास को ऐतिहासिक दृष्टि से प्रस्तुत करता है। लेखक काशीनाथ विश्वनाथ राजवाड़े ने इस कृति में आदिम समाज से लेकर विकसित सामाजिक संरचनाओं तक विवाह संस्था के क्रमिक विकास का गहन और वैज्ञानिक विश्लेषण किया है।

पुस्तिका इतिहासचर्या के प्रति लेखक के व्यापक अध्ययन और चिंतन की एक अनूठी उपलब्धि मानी जाती है। इसमें सामाजिक परंपराओं, रीति–रिवाजों और संस्थागत परिवर्तनों को शोधपरक दृष्टिकोण से समझाया गया है, जिससे पाठक भारतीय समाज के ऐतिहासिक विकास को गहराई से समझ पाते हैं।

यह कृति इतिहास, समाजशास्त्र, मानवशास्त्र और भारतीय सामाजिक संस्थाओं में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए अत्यंत उपयोगी है। तथ्यपरक विश्लेषण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण यह पुस्तक भारतीय विवाह संस्था के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में स्थापित होती है।