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एक पुरातत्ववेता का हलफनामा जनता के दरबार में

एक पुरातत्ववेता का हलफनामा जनता के दरबार में

Book Details

  • Author: डी. मण्डल

  • Edition: 2002–2003

  • Cover: Paperback

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक अयोध्या विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी और ऐतिहासिक दस्तावेज़ पर आधारित है। प्रस्तुत हलफनामा माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद (लखनऊ पीठ) के समक्ष दिनांक 5 दिसंबर 2005 को दाखिल किया गया था। यह हलफनामा सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ऑफ वक्फ की ओर से प्रस्तुत किया गया था और अयोध्या के विवादित स्थल से संबंधित तथ्यों और निष्कर्षों को न्यायालय के समक्ष रखने का उद्देश्य रखता है।

पुस्तक में अयोध्या के विवादित पुरास्थल के उत्खनन की प्रक्रिया का विवरण दिया गया है, जो माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद (लखनऊ पीठ) के आदेश के अनुसार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India – ASI) द्वारा वर्ष 2002–2003 में किया गया था। इसमें उत्खनन से जुड़े तथ्य, प्रक्रियाएँ और उनसे उत्पन्न कानूनी व ऐतिहासिक प्रश्नों पर प्रकाश डाला गया है।

यह कृति अयोध्या विवाद, भारतीय न्यायिक प्रक्रिया, पुरातत्व, इतिहास और समकालीन सामाजिक–राजनीतिक विमर्श में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। आधिकारिक दस्तावेज़ और तथ्यात्मक विवरणों के कारण यह पुस्तक शोधकर्ताओं, विधि के छात्रों और जागरूक पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में देखी जाती है।

$0.16

Original: $0.53

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  • Author: डी. मण्डल

  • Edition: 2002–2003

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About the Book
यह पुस्तक अयोध्या विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण कानूनी और ऐतिहासिक दस्तावेज़ पर आधारित है। प्रस्तुत हलफनामा माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद (लखनऊ पीठ) के समक्ष दिनांक 5 दिसंबर 2005 को दाखिल किया गया था। यह हलफनामा सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ऑफ वक्फ की ओर से प्रस्तुत किया गया था और अयोध्या के विवादित स्थल से संबंधित तथ्यों और निष्कर्षों को न्यायालय के समक्ष रखने का उद्देश्य रखता है।

पुस्तक में अयोध्या के विवादित पुरास्थल के उत्खनन की प्रक्रिया का विवरण दिया गया है, जो माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद (लखनऊ पीठ) के आदेश के अनुसार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India – ASI) द्वारा वर्ष 2002–2003 में किया गया था। इसमें उत्खनन से जुड़े तथ्य, प्रक्रियाएँ और उनसे उत्पन्न कानूनी व ऐतिहासिक प्रश्नों पर प्रकाश डाला गया है।

यह कृति अयोध्या विवाद, भारतीय न्यायिक प्रक्रिया, पुरातत्व, इतिहास और समकालीन सामाजिक–राजनीतिक विमर्श में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। आधिकारिक दस्तावेज़ और तथ्यात्मक विवरणों के कारण यह पुस्तक शोधकर्ताओं, विधि के छात्रों और जागरूक पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में देखी जाती है।