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हिन्दू पहचान की खोज

हिन्दू पहचान की खोज

Book Details

  • Author: डी. एन. झा

  • Edition: अप्रैल 2018

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 9788170072713

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात इतिहासकार डी. एन. झा द्वारा भारतीय इतिहास कांग्रेस के 66वें अधिवेशन के अवसर पर दिए गए अध्यक्षीय वक्तव्य पर आधारित एक महत्वपूर्ण वैचारिक कृति है। लेखक भारतीय इतिहास कांग्रेस और उसकी कार्यकारिणी समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस सम्मान को विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं और साथ ही अपनी बौद्धिक सीमाओं के प्रति सजग रहने की बात भी रखते हैं।

पुस्तक में इतिहास लेखन की जिम्मेदारी, अकादमिक विनम्रता और विद्वत परंपरा के महत्व को रेखांकित किया गया है। डी. एन. झा इतिहास को वैज्ञानिक, आलोचनात्मक और तथ्यपरक दृष्टिकोण से देखने पर बल देते हैं तथा इतिहासकार की सामाजिक भूमिका पर भी विचार प्रस्तुत करते हैं।

यह कृति इतिहास, historiography और अकादमिक परंपराओं में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और जागरूक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। स्पष्ट भाषा और विचारशील दृष्टिकोण के कारण यह पुस्तक भारतीय इतिहास लेखन की बौद्धिक परंपरा को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।

$0.32

Original: $1.07

-70%
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  • Author: डी. एन. झा

  • Edition: अप्रैल 2018

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 9788170072713

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात इतिहासकार डी. एन. झा द्वारा भारतीय इतिहास कांग्रेस के 66वें अधिवेशन के अवसर पर दिए गए अध्यक्षीय वक्तव्य पर आधारित एक महत्वपूर्ण वैचारिक कृति है। लेखक भारतीय इतिहास कांग्रेस और उसकी कार्यकारिणी समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस सम्मान को विनम्रता के साथ स्वीकार करते हैं और साथ ही अपनी बौद्धिक सीमाओं के प्रति सजग रहने की बात भी रखते हैं।

पुस्तक में इतिहास लेखन की जिम्मेदारी, अकादमिक विनम्रता और विद्वत परंपरा के महत्व को रेखांकित किया गया है। डी. एन. झा इतिहास को वैज्ञानिक, आलोचनात्मक और तथ्यपरक दृष्टिकोण से देखने पर बल देते हैं तथा इतिहासकार की सामाजिक भूमिका पर भी विचार प्रस्तुत करते हैं।

यह कृति इतिहास, historiography और अकादमिक परंपराओं में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और जागरूक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। स्पष्ट भाषा और विचारशील दृष्टिकोण के कारण यह पुस्तक भारतीय इतिहास लेखन की बौद्धिक परंपरा को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।