

Jawaharlal Hazir Ho/जवाहरलाल हाज़िर हो: Jel Ki Salakhon Ke Peechhe Pandit Nehru Ke 3259 Din/जेल की सलाख़ों के पीछे पंडित नेहरू के 3259 दिन
Author: Pankaj Chaturvedi/पंकज चतुर्वेदी
Brand: Random House Books for Young Readers
Binding: paperback
Number Of Pages: 208
Release Date: 15-11-2024
Details: आख़िर वे कौन से नौ अपराध थे, जिनके कारण ब्रितानी हुकूमत ने जवाहरलाल नेहरू को सजाएँ सुनाईं और जेल में बंद रखा? क्या जेल जीवन उतना सरल था?
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू 1922 में पहली बार जेल जाने और 1945 में आख़िरी बार रिहा होने के बीच कुल नौ बार जेल गए। सबसे कम 12 दिनों और सबसे अधिक 1,041 दिनों के लिए। वे कुल 3259 दिन यानी अपने जीवन के सवा आठ साल जेल में रहे।
यह कहानी है उस दौर में देश के चुनिंदा रईस परिवारों में से एक के इकलौते वारिस और लंदन में रह कर विद्यालय से विधि तक की पढ़ाई कर लौटे एक युवा की। वह जब गांधी जी के संपर्क में आया तो शानो-शौकत की ज़िंदगी त्यागकर देश की आज़ादी के संकल्प को जीवन का लक्ष्य बना लिया। एक दौर ऐसा आया कि घर के सारे लोग जेल में और घर में केवल बच्चे थे।
वास्तव में यह कहानी है कि किस तरह नेहरू ने सन् 1915 से 1947 तक लगातार संघर्ष में जेल और अदालत को अपनी बात कहने का माध्यम बनाया। हमारी आज़ादी की यात्रा, कारावास और कानून के सँकरे गलियारों से होते हुए हमारे संविधान तक पहुँची। यह पुस्तक महज़ अदालती कार्यवाही का दस्तावेज़ नहीं है, जवाहरलाल नेहरू की जेल यात्राओं दौरान घटित महत्त्वपूर्ण घटनाओं और स्वतंत्रता संग्राम के अनगिनत अनाम सेनानियों के संघर्ष का दस्तावेज़ है।
EAN: 9780143470663
Package Dimensions: 7.6 x 5.0 x 0.6 inches
Languages: Hindi
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Shipping & Returns
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Description
Author: Pankaj Chaturvedi/पंकज चतुर्वेदी
Brand: Random House Books for Young Readers
Binding: paperback
Number Of Pages: 208
Release Date: 15-11-2024
Details: आख़िर वे कौन से नौ अपराध थे, जिनके कारण ब्रितानी हुकूमत ने जवाहरलाल नेहरू को सजाएँ सुनाईं और जेल में बंद रखा? क्या जेल जीवन उतना सरल था?
भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू 1922 में पहली बार जेल जाने और 1945 में आख़िरी बार रिहा होने के बीच कुल नौ बार जेल गए। सबसे कम 12 दिनों और सबसे अधिक 1,041 दिनों के लिए। वे कुल 3259 दिन यानी अपने जीवन के सवा आठ साल जेल में रहे।
यह कहानी है उस दौर में देश के चुनिंदा रईस परिवारों में से एक के इकलौते वारिस और लंदन में रह कर विद्यालय से विधि तक की पढ़ाई कर लौटे एक युवा की। वह जब गांधी जी के संपर्क में आया तो शानो-शौकत की ज़िंदगी त्यागकर देश की आज़ादी के संकल्प को जीवन का लक्ष्य बना लिया। एक दौर ऐसा आया कि घर के सारे लोग जेल में और घर में केवल बच्चे थे।
वास्तव में यह कहानी है कि किस तरह नेहरू ने सन् 1915 से 1947 तक लगातार संघर्ष में जेल और अदालत को अपनी बात कहने का माध्यम बनाया। हमारी आज़ादी की यात्रा, कारावास और कानून के सँकरे गलियारों से होते हुए हमारे संविधान तक पहुँची। यह पुस्तक महज़ अदालती कार्यवाही का दस्तावेज़ नहीं है, जवाहरलाल नेहरू की जेल यात्राओं दौरान घटित महत्त्वपूर्ण घटनाओं और स्वतंत्रता संग्राम के अनगिनत अनाम सेनानियों के संघर्ष का दस्तावेज़ है।
EAN: 9780143470663
Package Dimensions: 7.6 x 5.0 x 0.6 inches
Languages: Hindi











