
जनं - जातियों के धार्मिक विश्वास (हार्ड बैक)
Book Details
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Author: अनिल राजिमवाले
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Edition: सितम्बर 2019
-
Cover: Paperback
-
Multiple Book Set: No
About the Book
यह पुस्तक धर्म के उदय और उसके विकास के आरंभिक चरणों को समझने का एक गंभीर, वैज्ञानिक और विचारोत्तेजक प्रयास है। लेखक अनिल राजिमवाले यह रेखांकित करते हैं कि धर्म के प्रारंभिक रूपों के बारे में हमारे पास प्रत्यक्ष ऐतिहासिक जानकारी अत्यंत सीमित है और इन चरणों से संबंधित तथ्य मुख्यतः पुरातात्विक सामग्री के माध्यम से ही उपलब्ध होते हैं।
पुस्तक में यह स्पष्ट किया गया है कि इन आरंभिक चरणों को जाने बिना हम प्राचीन पूर्वजों के रहन-सहन, सामाजिक संरचना तथा उनकी चमत्कारिक-धार्मिक विश्वास प्रणालियों को सही रूप में नहीं समझ सकते। लेखक धर्म को एक स्थिर या शाश्वत अवधारणा के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक विकास की एक ऐतिहासिक प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जो समय और परिस्थितियों के साथ विकसित होती रही है।
यह कृति इतिहास, मानवशास्त्र, समाजशास्त्र और धर्म के वैज्ञानिक अध्ययन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और जागरूक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। तर्कसंगत विश्लेषण और शोधपरक दृष्टिकोण के कारण यह पुस्तक धर्म और समाज के आपसी संबंधों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।
Original: $4.58
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Description
Book Details
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Author: अनिल राजिमवाले
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Edition: सितम्बर 2019
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Multiple Book Set: No
About the Book
यह पुस्तक धर्म के उदय और उसके विकास के आरंभिक चरणों को समझने का एक गंभीर, वैज्ञानिक और विचारोत्तेजक प्रयास है। लेखक अनिल राजिमवाले यह रेखांकित करते हैं कि धर्म के प्रारंभिक रूपों के बारे में हमारे पास प्रत्यक्ष ऐतिहासिक जानकारी अत्यंत सीमित है और इन चरणों से संबंधित तथ्य मुख्यतः पुरातात्विक सामग्री के माध्यम से ही उपलब्ध होते हैं।
पुस्तक में यह स्पष्ट किया गया है कि इन आरंभिक चरणों को जाने बिना हम प्राचीन पूर्वजों के रहन-सहन, सामाजिक संरचना तथा उनकी चमत्कारिक-धार्मिक विश्वास प्रणालियों को सही रूप में नहीं समझ सकते। लेखक धर्म को एक स्थिर या शाश्वत अवधारणा के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक विकास की एक ऐतिहासिक प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जो समय और परिस्थितियों के साथ विकसित होती रही है।
यह कृति इतिहास, मानवशास्त्र, समाजशास्त्र और धर्म के वैज्ञानिक अध्ययन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और जागरूक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। तर्कसंगत विश्लेषण और शोधपरक दृष्टिकोण के कारण यह पुस्तक धर्म और समाज के आपसी संबंधों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।












