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Laghu Parashari | लघु पाराशरी – (Hindi Edition) by Dr. Sushil Agarwal | Hindi Paperback

Laghu Parashari | लघु पाराशरी – (Hindi Edition) by Dr. Sushil Agarwal | Hindi Paperback

Author: DR. SUSHIL AGARWAL

Brand: Sagar Publications

Edition: First Edition

Binding: Paperback

Number Of Pages: 183

Release Date: 10-12-2025

Languages: Hindi
Laghu Parashari - Hindi उद्दुदायप्रदीप नामक मौलिक ग्रन्थ 'लघुपाराशरी ' के नाम से प्रसिद्ध है l इस ग्रन्थ में विशोत्तरी दशा पद्धति पर आधारित महत्वपूर्ण श्लोक दिए गए है l लघु पाराशरी में कुल ४२ श्लोक है जिनका आधार महर्षि पराशर विरचित बृहतपराशरहोराशास्त्रम है l इस ग्रन्थ में स्थानादिवस विशिष्ट फलो से सम्बन्धित महत्वपूर्ण सूत्रों का एकत्रीकरण है l इस सम्पूर्ण पुस्तक को ५ अध्यायों में विभाजित किया गया है l संज्ञाधयाय में मंगलाचरण,अन्तर्वस्तु, उद्देश्य, आधार आदि का विवरण है l द्वितीय अध्याय में मुख्यत: भावेशोंके शुभाशुभ होने की सूत्रों की व्याख्या है l तृतीय अध्याय में केन्द्रेश और त्रिकोणेश के परस्पर सम्बन्धो के आधार पर निमित होने वाले योगो को परिभासित किया गया है l चतुर्थ अध्याय में आयु भावो और मारक भावो के निर्धारण के अतिरिक्त भाव स्वामियों के मारकत्व के क्रम का विवेचन है l पञ्चम अध्याय में दशाफल में महत्वपूर्ण सूत्रों का सार है l परिशिष्ट में लघु पाराशरी का सरांश प्रस्तुत किया गया है जिससे समय समय पर त्वरित पुनरावलोकन किया जा सके l इस पुस्तक में सर्वप्रथम प्रत्येक श्लोक का अन्वय किया गया है l

$0.77

Original: $2.56

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Laghu Parashari | लघु पाराशरी – (Hindi Edition) by Dr. Sushil Agarwal | Hindi Paperback

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Product Information

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Description

Author: DR. SUSHIL AGARWAL

Brand: Sagar Publications

Edition: First Edition

Binding: Paperback

Number Of Pages: 183

Release Date: 10-12-2025

Languages: Hindi
Laghu Parashari - Hindi उद्दुदायप्रदीप नामक मौलिक ग्रन्थ 'लघुपाराशरी ' के नाम से प्रसिद्ध है l इस ग्रन्थ में विशोत्तरी दशा पद्धति पर आधारित महत्वपूर्ण श्लोक दिए गए है l लघु पाराशरी में कुल ४२ श्लोक है जिनका आधार महर्षि पराशर विरचित बृहतपराशरहोराशास्त्रम है l इस ग्रन्थ में स्थानादिवस विशिष्ट फलो से सम्बन्धित महत्वपूर्ण सूत्रों का एकत्रीकरण है l इस सम्पूर्ण पुस्तक को ५ अध्यायों में विभाजित किया गया है l संज्ञाधयाय में मंगलाचरण,अन्तर्वस्तु, उद्देश्य, आधार आदि का विवरण है l द्वितीय अध्याय में मुख्यत: भावेशोंके शुभाशुभ होने की सूत्रों की व्याख्या है l तृतीय अध्याय में केन्द्रेश और त्रिकोणेश के परस्पर सम्बन्धो के आधार पर निमित होने वाले योगो को परिभासित किया गया है l चतुर्थ अध्याय में आयु भावो और मारक भावो के निर्धारण के अतिरिक्त भाव स्वामियों के मारकत्व के क्रम का विवेचन है l पञ्चम अध्याय में दशाफल में महत्वपूर्ण सूत्रों का सार है l परिशिष्ट में लघु पाराशरी का सरांश प्रस्तुत किया गया है जिससे समय समय पर त्वरित पुनरावलोकन किया जा सके l इस पुस्तक में सर्वप्रथम प्रत्येक श्लोक का अन्वय किया गया है l