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मध्यकाल में औरतों की बलिया और हतियाएँ

मध्यकाल में औरतों की बलिया और हतियाएँ

Book Details

  • Author: केशव चंद्र

  • Edition: मई 2024

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 9788170072560

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक भारतीय समाज में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा और उत्पीड़न के ऐतिहासिक तथा सामाजिक कारणों पर गंभीर प्रकाश डालती है। लेखक केशव चंद्र समकालीन संदर्भ से शुरुआत करते हुए यह उल्लेख करते हैं कि आज भी भारत महिलाओं के लिए दुनिया के सबसे ख़तरनाक देशों में गिना जाता है, जैसा कि थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के ग्लोबल पोल से स्पष्ट होता है।

पुस्तक विशेष रूप से मध्यकालीन दौर में महिलाओं की बलि, हत्याओं और उत्पीड़न की ऐतिहासिक प्रक्रियाओं का विश्लेषण करती है। लेखक यह समझाने का प्रयास करते हैं कि किस प्रकार सामाजिक संरचनाओं, धार्मिक मान्यताओं और पितृसत्तात्मक सोच के माध्यम से महिलाओं को सदियों से उत्पीड़न सहने के लिए “तैयार” किया गया। यह उत्पीड़न केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी स्थापित किया गया।

यह कृति इतिहास, स्त्री अध्ययन, समाजशास्त्र और सामाजिक न्याय में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। तथ्यपरक विश्लेषण और आलोचनात्मक दृष्टिकोण के साथ लिखी गई यह पुस्तक महिलाओं के खिलाफ हिंसा की जड़ों को समझने और वर्तमान सामाजिक यथार्थ से जोड़ने में एक सशक्त योगदान देती है।



$0.45

Original: $1.49

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  • Edition: मई 2024

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यह पुस्तक भारतीय समाज में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा और उत्पीड़न के ऐतिहासिक तथा सामाजिक कारणों पर गंभीर प्रकाश डालती है। लेखक केशव चंद्र समकालीन संदर्भ से शुरुआत करते हुए यह उल्लेख करते हैं कि आज भी भारत महिलाओं के लिए दुनिया के सबसे ख़तरनाक देशों में गिना जाता है, जैसा कि थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के ग्लोबल पोल से स्पष्ट होता है।

पुस्तक विशेष रूप से मध्यकालीन दौर में महिलाओं की बलि, हत्याओं और उत्पीड़न की ऐतिहासिक प्रक्रियाओं का विश्लेषण करती है। लेखक यह समझाने का प्रयास करते हैं कि किस प्रकार सामाजिक संरचनाओं, धार्मिक मान्यताओं और पितृसत्तात्मक सोच के माध्यम से महिलाओं को सदियों से उत्पीड़न सहने के लिए “तैयार” किया गया। यह उत्पीड़न केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी स्थापित किया गया।

यह कृति इतिहास, स्त्री अध्ययन, समाजशास्त्र और सामाजिक न्याय में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। तथ्यपरक विश्लेषण और आलोचनात्मक दृष्टिकोण के साथ लिखी गई यह पुस्तक महिलाओं के खिलाफ हिंसा की जड़ों को समझने और वर्तमान सामाजिक यथार्थ से जोड़ने में एक सशक्त योगदान देती है।