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Mujhse Phir Mil : मुझसे फिर मिल : हरजीत सिंह की शायरी

Mujhse Phir Mil : मुझसे फिर मिल : हरजीत सिंह की शायरी

Brand: Sambhavna Prakashan

Features:

  • Harjeet Singh
  • Harjit Singh
  • हरजीत सिंह
  • Sambhavna Prakashan
  • Ghazal
  • Rajendra Sharma
  • Rajnish Gambhir
  • Naveen Kumar Naithani
  • Sahir Ludhianavi
  • Piyush Mishra

Binding: perfect

Number Of Pages: 240

Details: 5 जनवरी 1959 के दिन देहरादून में जन्मे शायर हरजीत सिंह हिन्दी के लोकप्रिय और अनूठे शायर थे जिन्होंने 1999 में अपनी असमय मृत्यु से पहले कई मुशायरे और काव्य-गोष्ठियों में शिरकत की थी, और जो लोगों की स्मृति में आज भी दर्ज हैं। अपने जीते-जी उन्होने दो ग़ज़ल संग्रह स्वप्रकाशित किये—ये हरे पेड़ हैं और एक पुल। तीसरे संग्रह खेल की पाण्डुलिपि वे अपनी मृत्यु से कुछ ही माह पहले अपने दोस्तों के हवाले कर गये, कुछ-कुछ ऐसा कहकर कि अब वे ‘‘इस सबसे’’ मुक्त हो जाना चाहते हैं और कि बाक़ी बचा मुआमला दोस्त लोग देख लें।

पेशे से वे बढ़ई थे, जिन्हें कुछ अपवादों को छोड़कर, अपने जीवन में शायद कभी ठीक से किसी भी चीज़ का मेहनताना मिला हो, तब भी बक़ौल एक मित्र—‘‘उन्हें अपने हालात को ठहाकों में उड़ाना आता था।’’ विख्यात स्वीडी उपन्यासकार लार्श ऐंडरसन उनके बहु-आयामी जीवन और बहुमुखी प्रतिभा से इस हद तक मुतासिर हुए थे कि उनके उपन्यास BERGET (परबत) का एक अहम् क़िरदार हरजीत से हुई उनकी मुलाकातों की बुनियाद पर टिका है। ऐसा क़िरदार जो मुफ़लिसी का जश्न मनाते हुए भी अपनी टूटी हुई छत से उड़ कर कमरे में आयी चिड़ियों के बारे में भी इस तरह के आशू शे’र कह लेता है—

आयीं चिड़ियाँ तो मैंने ये जाना मेरे कमरे में आसमान भी था

EAN: 9789392621284

Languages: Hindi

$2.65
Mujhse Phir Mil : मुझसे फिर मिल : हरजीत सिंह की शायरी
$2.65

Product Information

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Description

Brand: Sambhavna Prakashan

Features:

  • Harjeet Singh
  • Harjit Singh
  • हरजीत सिंह
  • Sambhavna Prakashan
  • Ghazal
  • Rajendra Sharma
  • Rajnish Gambhir
  • Naveen Kumar Naithani
  • Sahir Ludhianavi
  • Piyush Mishra

Binding: perfect

Number Of Pages: 240

Details: 5 जनवरी 1959 के दिन देहरादून में जन्मे शायर हरजीत सिंह हिन्दी के लोकप्रिय और अनूठे शायर थे जिन्होंने 1999 में अपनी असमय मृत्यु से पहले कई मुशायरे और काव्य-गोष्ठियों में शिरकत की थी, और जो लोगों की स्मृति में आज भी दर्ज हैं। अपने जीते-जी उन्होने दो ग़ज़ल संग्रह स्वप्रकाशित किये—ये हरे पेड़ हैं और एक पुल। तीसरे संग्रह खेल की पाण्डुलिपि वे अपनी मृत्यु से कुछ ही माह पहले अपने दोस्तों के हवाले कर गये, कुछ-कुछ ऐसा कहकर कि अब वे ‘‘इस सबसे’’ मुक्त हो जाना चाहते हैं और कि बाक़ी बचा मुआमला दोस्त लोग देख लें।

पेशे से वे बढ़ई थे, जिन्हें कुछ अपवादों को छोड़कर, अपने जीवन में शायद कभी ठीक से किसी भी चीज़ का मेहनताना मिला हो, तब भी बक़ौल एक मित्र—‘‘उन्हें अपने हालात को ठहाकों में उड़ाना आता था।’’ विख्यात स्वीडी उपन्यासकार लार्श ऐंडरसन उनके बहु-आयामी जीवन और बहुमुखी प्रतिभा से इस हद तक मुतासिर हुए थे कि उनके उपन्यास BERGET (परबत) का एक अहम् क़िरदार हरजीत से हुई उनकी मुलाकातों की बुनियाद पर टिका है। ऐसा क़िरदार जो मुफ़लिसी का जश्न मनाते हुए भी अपनी टूटी हुई छत से उड़ कर कमरे में आयी चिड़ियों के बारे में भी इस तरह के आशू शे’र कह लेता है—

आयीं चिड़ियाँ तो मैंने ये जाना मेरे कमरे में आसमान भी था

EAN: 9789392621284

Languages: Hindi