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फ़कीरमोहन सेनापति: Fakir Mohan Senapati (Makers of Indian literature) (An Old & Rare Books)

फ़कीरमोहन सेनापति: Fakir Mohan Senapati (Makers of Indian literature) (An Old & Rare Books)

Book Details
Publisher: Sahitya Akademi
Author: Mayadhar Mansinha
Language: Hindi
Edition: 1983
Pages: 76
Cover: Paperback
Dimensions: 21.5 cm × 14 cm
Weight: 120 gm
UAP: UAP713

About the Book
यह पुस्तक हिंदी साहित्य और सांस्कृतिक चिंतन के क्षेत्र में एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है। लेखक मायाधर मानसिंह ने इसमें अपने गहन साहित्यिक अनुभव और वैचारिक दृष्टि के माध्यम से विषय को स्पष्ट, संतुलित और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया है। कम पृष्ठों में भी पुस्तक विचारों की गंभीरता और बौद्धिक स्पष्टता के लिए उल्लेखनीय है।

लेखक की भाषा सरल, संयत और भावपूर्ण है, जिससे पाठक सहज रूप से विषय से जुड़ जाता है। पुस्तक में साहित्य, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं के विविध पक्षों को संक्षेप में लेकिन सारगर्भित ढंग से रखा गया है। यह कृति पाठक को साहित्यिक मूल्यों और रचनात्मक सोच पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

साहित्य अकादेमी द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और गंभीर पाठकों के लिए उपयोगी है। अध्ययन और संदर्भ के साथ-साथ यह एक संग्रहणीय साहित्यिक दस्तावेज के रूप में भी अपना विशेष महत्व रखती है, विशेषकर उन पाठकों के लिए जो संक्षिप्त लेकिन विचारपूर्ण साहित्य में रुचि रखते हैं।



$0.16
फ़कीरमोहन सेनापति: Fakir Mohan Senapati (Makers of Indian literature) (An Old & Rare Books)
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Product Information

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Description

Book Details
Publisher: Sahitya Akademi
Author: Mayadhar Mansinha
Language: Hindi
Edition: 1983
Pages: 76
Cover: Paperback
Dimensions: 21.5 cm × 14 cm
Weight: 120 gm
UAP: UAP713

About the Book
यह पुस्तक हिंदी साहित्य और सांस्कृतिक चिंतन के क्षेत्र में एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है। लेखक मायाधर मानसिंह ने इसमें अपने गहन साहित्यिक अनुभव और वैचारिक दृष्टि के माध्यम से विषय को स्पष्ट, संतुलित और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया है। कम पृष्ठों में भी पुस्तक विचारों की गंभीरता और बौद्धिक स्पष्टता के लिए उल्लेखनीय है।

लेखक की भाषा सरल, संयत और भावपूर्ण है, जिससे पाठक सहज रूप से विषय से जुड़ जाता है। पुस्तक में साहित्य, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं के विविध पक्षों को संक्षेप में लेकिन सारगर्भित ढंग से रखा गया है। यह कृति पाठक को साहित्यिक मूल्यों और रचनात्मक सोच पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

साहित्य अकादेमी द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और गंभीर पाठकों के लिए उपयोगी है। अध्ययन और संदर्भ के साथ-साथ यह एक संग्रहणीय साहित्यिक दस्तावेज के रूप में भी अपना विशेष महत्व रखती है, विशेषकर उन पाठकों के लिए जो संक्षिप्त लेकिन विचारपूर्ण साहित्य में रुचि रखते हैं।