
साम्पदायिक इतिहास और राम की अयोध्या
Book Details
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Author: राम शरण शर्मा
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Edition: अक्टूबर 2015
-
Cover: Paperback
-
ISBN: 8170071118
-
Multiple Book Set: No
About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात इतिहासकार राम शरण शर्मा के गहन और वैज्ञानिक इतिहास लेखन को प्रस्तुत करती है। लेखक ने इसमें प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक प्रश्नों का विश्लेषण किया है। उनका दृष्टिकोण इतिहास को केवल राजाओं और घटनाओं की कथा के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक संरचनाओं और आर्थिक प्रक्रियाओं के विकास के रूप में समझने पर आधारित है।
पुस्तक में ऐतिहासिक तथ्यों को आलोचनात्मक दृष्टि से परखा गया है और परंपरागत व्याख्याओं की समीक्षा की गई है। लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि इतिहास लेखन में वैज्ञानिक पद्धति, स्रोतों की जाँच और तर्कसंगत विश्लेषण कितने आवश्यक हैं।
यह कृति इतिहास के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं तथा भारतीय इतिहास को तथ्यपरक और प्रगतिशील दृष्टिकोण से समझने के इच्छुक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। स्पष्ट भाषा, अकादमिक गंभीरता और वैचारिक स्पष्टता के कारण यह पुस्तक इतिहास अध्ययन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।
Original: $0.16
-69%$0.16
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Description
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Author: राम शरण शर्मा
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Edition: अक्टूबर 2015
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Cover: Paperback
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ISBN: 8170071118
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About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात इतिहासकार राम शरण शर्मा के गहन और वैज्ञानिक इतिहास लेखन को प्रस्तुत करती है। लेखक ने इसमें प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक प्रश्नों का विश्लेषण किया है। उनका दृष्टिकोण इतिहास को केवल राजाओं और घटनाओं की कथा के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक संरचनाओं और आर्थिक प्रक्रियाओं के विकास के रूप में समझने पर आधारित है।
पुस्तक में ऐतिहासिक तथ्यों को आलोचनात्मक दृष्टि से परखा गया है और परंपरागत व्याख्याओं की समीक्षा की गई है। लेखक यह स्पष्ट करते हैं कि इतिहास लेखन में वैज्ञानिक पद्धति, स्रोतों की जाँच और तर्कसंगत विश्लेषण कितने आवश्यक हैं।
यह कृति इतिहास के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं तथा भारतीय इतिहास को तथ्यपरक और प्रगतिशील दृष्टिकोण से समझने के इच्छुक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। स्पष्ट भाषा, अकादमिक गंभीरता और वैचारिक स्पष्टता के कारण यह पुस्तक इतिहास अध्ययन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।












