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शिवजी कौन थे

शिवजी कौन थे

Book Details

  • Author: गोविन्द पानसरे

  • Edition: मार्च 2023

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 9789395557290

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और विचारक गोविन्द पानसरे के एक महत्वपूर्ण व्याख्यान पर आधारित है, जो हम भारतीय नामक आंदोलन के तत्वावधान में 11 मई 1987 को दिया गया था। यह भाषण शिवाजी महाराज के काल की ऐतिहासिक प्रमाणिकता के विशेष प्रश्न पर केंद्रित था और उस समय की वैचारिक बहसों में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप माना जाता है।

सभा की अध्यक्षता समाजवादी प्रबोधिनी के महासचिव प्रो. सुभाष पाटिल ने की थी। पानसरे ने अपने भाषण में इतिहास को मिथकों और भावनात्मक अतिरंजनाओं से अलग कर, तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर समझने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने यह दिखाने का प्रयास किया कि शिवाजी के समय और उनके संघर्षों को वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से कैसे देखा जाना चाहिए।

यह कृति इतिहास, सामाजिक आंदोलनों और प्रगतिशील चिंतन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। स्पष्ट तर्क, तथ्यपरक विश्लेषण और वैचारिक ईमानदारी के कारण यह पुस्तक इतिहास लेखन और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान मानी जाती है।

$0.32

Original: $1.07

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  • Author: गोविन्द पानसरे

  • Edition: मार्च 2023

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 9789395557290

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About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और विचारक गोविन्द पानसरे के एक महत्वपूर्ण व्याख्यान पर आधारित है, जो हम भारतीय नामक आंदोलन के तत्वावधान में 11 मई 1987 को दिया गया था। यह भाषण शिवाजी महाराज के काल की ऐतिहासिक प्रमाणिकता के विशेष प्रश्न पर केंद्रित था और उस समय की वैचारिक बहसों में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप माना जाता है।

सभा की अध्यक्षता समाजवादी प्रबोधिनी के महासचिव प्रो. सुभाष पाटिल ने की थी। पानसरे ने अपने भाषण में इतिहास को मिथकों और भावनात्मक अतिरंजनाओं से अलग कर, तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर समझने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने यह दिखाने का प्रयास किया कि शिवाजी के समय और उनके संघर्षों को वैज्ञानिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से कैसे देखा जाना चाहिए।

यह कृति इतिहास, सामाजिक आंदोलनों और प्रगतिशील चिंतन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। स्पष्ट तर्क, तथ्यपरक विश्लेषण और वैचारिक ईमानदारी के कारण यह पुस्तक इतिहास लेखन और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान मानी जाती है।