
विवादग्रस्त मस्जिद : एक इतिहासिक छानबीन
Book Details
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Author: सुशील श्रीवास्तव
-
Edition: 2015
-
Cover: Paperback
-
ISBN: 8170071593
-
Multiple Book Set: No
About the Book
यह पुस्तक कुछ मित्रों के साथ हुए गंभीर विचार–विमर्श का परिणाम है, जिन्होंने लेखक सुशील श्रीवास्तव को बाबरी मस्जिद–राम जन्मभूमि विवाद की गहन छानबीन करने के लिए प्रेरित किया। लेखक बताते हैं कि 1986 के शुरुआती दिनों में ही यह स्पष्ट रूप से महसूस होने लगा था कि उत्तर भारत में सांप्रदायिक स्थिति तेजी से बिगड़ती जा रही है।
पुस्तक में उस सामाजिक माहौल का विश्लेषण किया गया है, जहाँ धार्मिक शत्रुता और साम्प्रदायिक तनाव नियंत्रण से बाहर होने लगते हैं। लेखक यह दर्शाते हैं कि ऐसे समाज में आम नागरिक स्वयं को अकेला, असुरक्षित और भयग्रस्त महसूस करने लगता है। विवाद के ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक पक्षों को तथ्यपरक दृष्टि से प्रस्तुत करते हुए पुस्तक सांप्रदायिकता के मूल कारणों पर गंभीर प्रश्न उठाती है।
यह कृति समकालीन भारतीय राजनीति, सांप्रदायिकता, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्लेषणात्मक भाषा और संवेदनशील दृष्टिकोण के कारण यह पुस्तक बाबरी मस्जिद–राम जन्मभूमि विवाद को समझने के लिए एक उपयोगी और विचारोत्तेजक संदर्भ प्रदान करती है।
Original: $0.80
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Description
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Author: सुशील श्रीवास्तव
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Edition: 2015
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Cover: Paperback
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ISBN: 8170071593
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Multiple Book Set: No
About the Book
यह पुस्तक कुछ मित्रों के साथ हुए गंभीर विचार–विमर्श का परिणाम है, जिन्होंने लेखक सुशील श्रीवास्तव को बाबरी मस्जिद–राम जन्मभूमि विवाद की गहन छानबीन करने के लिए प्रेरित किया। लेखक बताते हैं कि 1986 के शुरुआती दिनों में ही यह स्पष्ट रूप से महसूस होने लगा था कि उत्तर भारत में सांप्रदायिक स्थिति तेजी से बिगड़ती जा रही है।
पुस्तक में उस सामाजिक माहौल का विश्लेषण किया गया है, जहाँ धार्मिक शत्रुता और साम्प्रदायिक तनाव नियंत्रण से बाहर होने लगते हैं। लेखक यह दर्शाते हैं कि ऐसे समाज में आम नागरिक स्वयं को अकेला, असुरक्षित और भयग्रस्त महसूस करने लगता है। विवाद के ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक पक्षों को तथ्यपरक दृष्टि से प्रस्तुत करते हुए पुस्तक सांप्रदायिकता के मूल कारणों पर गंभीर प्रश्न उठाती है।
यह कृति समकालीन भारतीय राजनीति, सांप्रदायिकता, सामाजिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्लेषणात्मक भाषा और संवेदनशील दृष्टिकोण के कारण यह पुस्तक बाबरी मस्जिद–राम जन्मभूमि विवाद को समझने के लिए एक उपयोगी और विचारोत्तेजक संदर्भ प्रदान करती है।












