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भारत- आदिम साम्यवाद से दास प्रथा का इतिहास

भारत- आदिम साम्यवाद से दास प्रथा का इतिहास

Book Details

  • Author: श्रीपाद अमृत डांगे

  • Edition: 2013

  • Cover: Paperback

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक श्रीपाद अमृत डांगे द्वारा लिखी गई है, जिसमें उन्होंने अपने विचारों को विशेष रूप से जेल में अक्टूबर 1942 से लेकर जनवरी 1943 तक के समय में व्यक्त किया। पुस्तक का मुख्य भाग इस अवधि में लिखा गया था, और लेखक स्वयं स्वीकार करते हैं कि इस दौरान सीमित संसाधनों और परिस्थितियों के कारण विषय का निरूपण पूरी तरह से संपन्न नहीं हो सका है।

लेखक के अनुसार, इस पुस्तक में जिस विषय का निरूपण किया गया है, वह इतनी पूर्णता और व्यापकता के साथ नहीं किया जा सका, जितना कि आवश्यक था। इसके कारण पाठकों को कुछ कमियों का अनुभव हो सकता है। साथ ही, इस पुस्तक में संस्कृत भाषा के प्राचीन ग्रंथों और आधुनिक विद्वानों द्वारा संकलित सामग्री का उपयोग भी पूरी तरह से नहीं हो सका।

यह कृति भारतीय इतिहास, साहित्य, और समाजशास्त्र में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। पुस्तक में लेखक का विचारशील दृष्टिकोण और उन कठिन समय में की गई बौद्धिक यात्रा, यह इसे शोधकर्ताओं और साहित्य प्रेमियों के लिए एक मूल्यवान संदर्भ बनाती है।

$2.13
भारत- आदिम साम्यवाद से दास प्रथा का इतिहास
$2.13

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Description

Book Details

  • Author: श्रीपाद अमृत डांगे

  • Edition: 2013

  • Cover: Paperback

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक श्रीपाद अमृत डांगे द्वारा लिखी गई है, जिसमें उन्होंने अपने विचारों को विशेष रूप से जेल में अक्टूबर 1942 से लेकर जनवरी 1943 तक के समय में व्यक्त किया। पुस्तक का मुख्य भाग इस अवधि में लिखा गया था, और लेखक स्वयं स्वीकार करते हैं कि इस दौरान सीमित संसाधनों और परिस्थितियों के कारण विषय का निरूपण पूरी तरह से संपन्न नहीं हो सका है।

लेखक के अनुसार, इस पुस्तक में जिस विषय का निरूपण किया गया है, वह इतनी पूर्णता और व्यापकता के साथ नहीं किया जा सका, जितना कि आवश्यक था। इसके कारण पाठकों को कुछ कमियों का अनुभव हो सकता है। साथ ही, इस पुस्तक में संस्कृत भाषा के प्राचीन ग्रंथों और आधुनिक विद्वानों द्वारा संकलित सामग्री का उपयोग भी पूरी तरह से नहीं हो सका।

यह कृति भारतीय इतिहास, साहित्य, और समाजशास्त्र में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है। पुस्तक में लेखक का विचारशील दृष्टिकोण और उन कठिन समय में की गई बौद्धिक यात्रा, यह इसे शोधकर्ताओं और साहित्य प्रेमियों के लिए एक मूल्यवान संदर्भ बनाती है।