
निराला
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Author: राहुल सांकृत्यायन
-
Edition: 1989
-
Cover: Paperback
-
Multiple Book Set: No
About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात लेखक, इतिहासकार और घुमक्कड़ विद्वान राहुल सांकृत्यायन की वैचारिक और साहित्यिक परंपरा को प्रस्तुत करती है। राहुल सांकृत्यायन भारतीय बौद्धिक जगत में अपने बहुआयामी योगदान—इतिहास, दर्शन, यात्रा-वृत्तांत और सामाजिक चिंतन—के लिए जाने जाते हैं।
इस कृति में लेखक का उद्देश्य ज्ञान को व्यापक समाज तक पहुँचाना और पाठकों को इतिहास, संस्कृति तथा मानव सभ्यता के विकास की गहरी समझ प्रदान करना है। उनकी लेखनी तर्कशील, वैज्ञानिक और प्रगतिशील दृष्टिकोण से परिपूर्ण है, जो पाठक को रूढ़ियों से परे सोचने के लिए प्रेरित करती है।
यह पुस्तक हिंदी साहित्य, इतिहास, दर्शन और सामाजिक चिंतन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और सामान्य पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी है। स्पष्ट भाषा, वैचारिक गहराई और ज्ञानवर्धक दृष्टि के कारण यह कृति राहुल सांकृत्यायन के साहित्यिक योगदान को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ मानी जाती है।
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-69%$0.13
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Description
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Author: राहुल सांकृत्यायन
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Edition: 1989
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Cover: Paperback
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Multiple Book Set: No
About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात लेखक, इतिहासकार और घुमक्कड़ विद्वान राहुल सांकृत्यायन की वैचारिक और साहित्यिक परंपरा को प्रस्तुत करती है। राहुल सांकृत्यायन भारतीय बौद्धिक जगत में अपने बहुआयामी योगदान—इतिहास, दर्शन, यात्रा-वृत्तांत और सामाजिक चिंतन—के लिए जाने जाते हैं।
इस कृति में लेखक का उद्देश्य ज्ञान को व्यापक समाज तक पहुँचाना और पाठकों को इतिहास, संस्कृति तथा मानव सभ्यता के विकास की गहरी समझ प्रदान करना है। उनकी लेखनी तर्कशील, वैज्ञानिक और प्रगतिशील दृष्टिकोण से परिपूर्ण है, जो पाठक को रूढ़ियों से परे सोचने के लिए प्रेरित करती है।
यह पुस्तक हिंदी साहित्य, इतिहास, दर्शन और सामाजिक चिंतन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और सामान्य पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी है। स्पष्ट भाषा, वैचारिक गहराई और ज्ञानवर्धक दृष्टि के कारण यह कृति राहुल सांकृत्यायन के साहित्यिक योगदान को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ मानी जाती है।








