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पापा जब बच्चे थे

पापा जब बच्चे थे

Book Details

  • Author: अलेक्सांद्र रसिकन

  • Edition: मार्च 2016

  • Cover: Paperback

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक लेखक अलेक्सांद्र रसिकन की एक संवेदनशील और आत्मीय रचना है, जिसमें वे यह स्पष्ट करते हैं कि उन्होंने यह किताब क्यों लिखी। लेखक अपनी बेटी साशा के माध्यम से जीवन के अनुभवों, भावनाओं और मानवीय पीड़ा को अत्यंत सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हैं। साशा के बचपन की यादों, उसकी बीमारी और उससे जुड़ी चिंताओं के माध्यम से लेखक पाठक को एक भावनात्मक यात्रा पर ले जाते हैं।

पुस्तक में बचपन की बीमारियों, दर्द और असहायता के अनुभवों को मानवीय दृष्टि से चित्रित किया गया है। लेखक यह दिखाते हैं कि दर्द केवल शारीरिक अनुभव नहीं होता, बल्कि वह संवेदना, सहानुभूति और समझ से भी जुड़ा होता है। कान के दर्द जैसे साधारण उदाहरण के माध्यम से लेखक यह समझाने का प्रयास करते हैं कि पीड़ा को वही व्यक्ति पूरी तरह समझ सकता है, जिसने उसे स्वयं अनुभव किया हो।

यह कृति मानवीय भावनाओं, पारिवारिक संबंधों और जीवन के छोटे लेकिन गहरे अनुभवों पर आधारित है। सरल भाषा और आत्मकथात्मक शैली के कारण यह पुस्तक साहित्य, संस्मरण और मानवीय संवेदना में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत पठनीय और प्रभावशाली है।



$0.32

Original: $1.07

-70%
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  • Author: अलेक्सांद्र रसिकन

  • Edition: मार्च 2016

  • Cover: Paperback

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक लेखक अलेक्सांद्र रसिकन की एक संवेदनशील और आत्मीय रचना है, जिसमें वे यह स्पष्ट करते हैं कि उन्होंने यह किताब क्यों लिखी। लेखक अपनी बेटी साशा के माध्यम से जीवन के अनुभवों, भावनाओं और मानवीय पीड़ा को अत्यंत सरल और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हैं। साशा के बचपन की यादों, उसकी बीमारी और उससे जुड़ी चिंताओं के माध्यम से लेखक पाठक को एक भावनात्मक यात्रा पर ले जाते हैं।

पुस्तक में बचपन की बीमारियों, दर्द और असहायता के अनुभवों को मानवीय दृष्टि से चित्रित किया गया है। लेखक यह दिखाते हैं कि दर्द केवल शारीरिक अनुभव नहीं होता, बल्कि वह संवेदना, सहानुभूति और समझ से भी जुड़ा होता है। कान के दर्द जैसे साधारण उदाहरण के माध्यम से लेखक यह समझाने का प्रयास करते हैं कि पीड़ा को वही व्यक्ति पूरी तरह समझ सकता है, जिसने उसे स्वयं अनुभव किया हो।

यह कृति मानवीय भावनाओं, पारिवारिक संबंधों और जीवन के छोटे लेकिन गहरे अनुभवों पर आधारित है। सरल भाषा और आत्मकथात्मक शैली के कारण यह पुस्तक साहित्य, संस्मरण और मानवीय संवेदना में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत पठनीय और प्रभावशाली है।