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बाल हृदय की गहराइयाँ (PB)

बाल हृदय की गहराइयाँ (PB)

Book Details

  • Author: वसीली सुखोमलिन्स्की

  • Edition: जनवरी 2011

  • Cover: Paperback

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात शिक्षाविद् वसीली सुखोमलिन्स्की के दीर्घकालीन शैक्षिक अनुभवों और मानवीय चिंतन का सार प्रस्तुत करती है। लेखक ने लगभग 33 वर्षों तक एक ग्रामीण विद्यालय में कार्य किया और इसी अनुभव को वे अपने जीवन का परम सौभाग्य मानते हैं। इन वर्षों के दौरान उन्होंने शिक्षा, बच्चों के मनोविज्ञान, शिक्षक की भूमिका और समाज के साथ विद्यालय के संबंधों को निकट से देखा, समझा और महसूस किया।

पुस्तक में लेखक अपने अनुभवों के आधार पर यह बताते हैं कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं के विकास से गहराई से जुड़ी होती है। ग्रामीण परिवेश में कार्य करते हुए जो चिंताएँ, प्रश्न और व्यथाएँ उनके मन में उत्पन्न हुईं, वही इस पुस्तक का मूल आधार हैं।

यह कृति शिक्षकों, शिक्षाविदों, अभिभावकों और शिक्षा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। अनुभवजन्य भाषा और गहन विचारशीलता के साथ लिखी गई यह पुस्तक शिक्षा को एक मानवीय और संवेदनशील प्रक्रिया के रूप में समझने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

$1.12

Original: $3.73

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  • Author: वसीली सुखोमलिन्स्की

  • Edition: जनवरी 2011

  • Cover: Paperback

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक प्रख्यात शिक्षाविद् वसीली सुखोमलिन्स्की के दीर्घकालीन शैक्षिक अनुभवों और मानवीय चिंतन का सार प्रस्तुत करती है। लेखक ने लगभग 33 वर्षों तक एक ग्रामीण विद्यालय में कार्य किया और इसी अनुभव को वे अपने जीवन का परम सौभाग्य मानते हैं। इन वर्षों के दौरान उन्होंने शिक्षा, बच्चों के मनोविज्ञान, शिक्षक की भूमिका और समाज के साथ विद्यालय के संबंधों को निकट से देखा, समझा और महसूस किया।

पुस्तक में लेखक अपने अनुभवों के आधार पर यह बताते हैं कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं के विकास से गहराई से जुड़ी होती है। ग्रामीण परिवेश में कार्य करते हुए जो चिंताएँ, प्रश्न और व्यथाएँ उनके मन में उत्पन्न हुईं, वही इस पुस्तक का मूल आधार हैं।

यह कृति शिक्षकों, शिक्षाविदों, अभिभावकों और शिक्षा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। अनुभवजन्य भाषा और गहन विचारशीलता के साथ लिखी गई यह पुस्तक शिक्षा को एक मानवीय और संवेदनशील प्रक्रिया के रूप में समझने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।