🚚 Free Worldwide Shipping on All Orders!Shop Now
Product image 1
HomeStore

आरक्षण किसके लिए

आरक्षण किसके लिए

Book Details

  • Author: पी. एस. कृष्णन

  • Edition: जून 2016

  • Cover: Paperback

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक पी. एस. कृष्णन के सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े विचारों को प्रस्तुत करती है। लेखक ने अपने दीर्घ प्रशासनिक और वैचारिक अनुभवों के आधार पर भारतीय समाज में जाति, वर्ग और सामाजिक असमानताओं से संबंधित प्रश्नों पर गंभीर विश्लेषण किया है।

पुस्तक में संवैधानिक प्रावधानों, आरक्षण नीति और सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों की पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि इन नीतियों का उद्देश्य केवल प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों को समान अवसर प्रदान करना है। लेखक व्यावहारिक अनुभव और तथ्यों के माध्यम से सामाजिक न्याय की चुनौतियों और संभावनाओं पर प्रकाश डालते हैं।

यह कृति सामाजिक विज्ञान, सार्वजनिक नीति, भारतीय संविधान और सामाजिक न्याय में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और जागरूक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। स्पष्ट भाषा और तथ्यपरक दृष्टिकोण के कारण यह पुस्तक समकालीन सामाजिक विमर्श में एक महत्वपूर्ण योगदान मानी जाती है।

$0.10

Original: $0.32

-69%
आरक्षण किसके लिए

$0.32

$0.10

Product Information

Shipping & Returns

Description

Book Details

  • Author: पी. एस. कृष्णन

  • Edition: जून 2016

  • Cover: Paperback

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक पी. एस. कृष्णन के सामाजिक न्याय, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों से जुड़े विचारों को प्रस्तुत करती है। लेखक ने अपने दीर्घ प्रशासनिक और वैचारिक अनुभवों के आधार पर भारतीय समाज में जाति, वर्ग और सामाजिक असमानताओं से संबंधित प्रश्नों पर गंभीर विश्लेषण किया है।

पुस्तक में संवैधानिक प्रावधानों, आरक्षण नीति और सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों की पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि इन नीतियों का उद्देश्य केवल प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों को समान अवसर प्रदान करना है। लेखक व्यावहारिक अनुभव और तथ्यों के माध्यम से सामाजिक न्याय की चुनौतियों और संभावनाओं पर प्रकाश डालते हैं।

यह कृति सामाजिक विज्ञान, सार्वजनिक नीति, भारतीय संविधान और सामाजिक न्याय में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और जागरूक पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। स्पष्ट भाषा और तथ्यपरक दृष्टिकोण के कारण यह पुस्तक समकालीन सामाजिक विमर्श में एक महत्वपूर्ण योगदान मानी जाती है।