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साम्राज्यवाद पूंजीवाद की चरम अवस्था

साम्राज्यवाद पूंजीवाद की चरम अवस्था

Book Details

  • Author: व्ला. इ. लेनिन

  • Edition: सितम्बर 2011

  • Cover: Paperback

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तिका व्ला. इ. लेनिन द्वारा 1916 के वसंत ऋतु में ज़्यूरिख में लिखी गई थी, जब वे विशेष परिस्थितियों में कार्य करने के लिए विवश थे। उस समय फ्रांसीसी और अंग्रेज़ी साहित्य की उपलब्धता सीमित थी, जबकि रूसी साहित्य का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक था। इन सीमाओं के बावजूद, लेनिन ने साम्राज्यवाद के अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी भाषा की प्रमुख कृति—जे. ए. हॉब्सन की पुस्तक—का गहन और सावधानीपूर्वक उपयोग किया, जिसे वे अपने विचार में पूर्णतः योग्य मानते थे।

पुस्तक में साम्राज्यवाद को पूँजीवाद के एक विशिष्ट और उच्चतम चरण के रूप में समझाने का प्रयास किया गया है। लेनिन आर्थिक एकाग्रता, पूँजी के निर्यात, वित्तीय पूँजी और साम्राज्यवादी शक्तियों के आपसी टकराव जैसे विषयों का विश्लेषण करते हैं। ऐतिहासिक तथ्यों और सैद्धांतिक स्पष्टता के साथ प्रस्तुत यह कृति आधुनिक विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।

यह पुस्तक राजनीति, इतिहास, अर्थशास्त्र और मार्क्सवादी विचारधारा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। वैचारिक गहराई और ऐतिहासिक संदर्भों के कारण यह कृति आज भी साम्राज्यवाद और वैश्विक पूँजीवादी व्यवस्था को समझने के लिए प्रासंगिक बनी हुई है।



$0.16

Original: $0.53

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  • Author: व्ला. इ. लेनिन

  • Edition: सितम्बर 2011

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About the Book
यह पुस्तिका व्ला. इ. लेनिन द्वारा 1916 के वसंत ऋतु में ज़्यूरिख में लिखी गई थी, जब वे विशेष परिस्थितियों में कार्य करने के लिए विवश थे। उस समय फ्रांसीसी और अंग्रेज़ी साहित्य की उपलब्धता सीमित थी, जबकि रूसी साहित्य का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक था। इन सीमाओं के बावजूद, लेनिन ने साम्राज्यवाद के अध्ययन के लिए अंग्रेज़ी भाषा की प्रमुख कृति—जे. ए. हॉब्सन की पुस्तक—का गहन और सावधानीपूर्वक उपयोग किया, जिसे वे अपने विचार में पूर्णतः योग्य मानते थे।

पुस्तक में साम्राज्यवाद को पूँजीवाद के एक विशिष्ट और उच्चतम चरण के रूप में समझाने का प्रयास किया गया है। लेनिन आर्थिक एकाग्रता, पूँजी के निर्यात, वित्तीय पूँजी और साम्राज्यवादी शक्तियों के आपसी टकराव जैसे विषयों का विश्लेषण करते हैं। ऐतिहासिक तथ्यों और सैद्धांतिक स्पष्टता के साथ प्रस्तुत यह कृति आधुनिक विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।

यह पुस्तक राजनीति, इतिहास, अर्थशास्त्र और मार्क्सवादी विचारधारा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। वैचारिक गहराई और ऐतिहासिक संदर्भों के कारण यह कृति आज भी साम्राज्यवाद और वैश्विक पूँजीवादी व्यवस्था को समझने के लिए प्रासंगिक बनी हुई है।