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दर्शन की दरिद्रता (HB)

दर्शन की दरिद्रता (HB)

Book Details

  • Author: काल मार्क्स

  • Edition: जून 2011

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 9788170072331

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह रचना काल मार्क्स द्वारा 1846–47 के शीतकाल में लिखी गई थी, उस समय जब वे अपने नए ऐतिहासिक और आर्थिक दृष्टिकोण की मूल रूपरेखा को स्पष्ट रूप से विकसित कर चुके थे। इसी दौर में पियरे-जोज़ेफ प्रूधों की पुस्तक “दरिद्रता का दर्शन” प्रकाशित हुई, जिसने मार्क्स को अपने विचारों को और अधिक व्यवस्थित तथा विकसित करने का अवसर प्रदान किया।

मार्क्स ने इस कृति में अपने ऐतिहासिक भौतिकवादी दृष्टिकोण को मजबूती से स्थापित किया, क्योंकि वे ऐसे विचारक का प्रतिवाद कर रहे थे, जो उस समय के फ्रांसीसी समाजवाद में एक प्रमुख स्थान रखते थे। पुस्तक में आर्थिक सिद्धांतों, सामाजिक संबंधों और वर्गीय दृष्टिकोण का गहन विश्लेषण किया गया है, जो बाद में मार्क्सवादी चिंतन की आधारशिला बना।

यह कृति मार्क्सवादी दर्शन, राजनीतिक अर्थशास्त्र और समाजवादी विचारधारा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐतिहासिक संदर्भ और वैचारिक स्पष्टता के कारण यह पुस्तक मार्क्स के बौद्धिक विकास को समझने और उनके सिद्धांतों की पृष्ठभूमि जानने के लिए एक आवश्यक संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।



$0.56

Original: $1.86

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  • Author: काल मार्क्स

  • Edition: जून 2011

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 9788170072331

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About the Book
यह रचना काल मार्क्स द्वारा 1846–47 के शीतकाल में लिखी गई थी, उस समय जब वे अपने नए ऐतिहासिक और आर्थिक दृष्टिकोण की मूल रूपरेखा को स्पष्ट रूप से विकसित कर चुके थे। इसी दौर में पियरे-जोज़ेफ प्रूधों की पुस्तक “दरिद्रता का दर्शन” प्रकाशित हुई, जिसने मार्क्स को अपने विचारों को और अधिक व्यवस्थित तथा विकसित करने का अवसर प्रदान किया।

मार्क्स ने इस कृति में अपने ऐतिहासिक भौतिकवादी दृष्टिकोण को मजबूती से स्थापित किया, क्योंकि वे ऐसे विचारक का प्रतिवाद कर रहे थे, जो उस समय के फ्रांसीसी समाजवाद में एक प्रमुख स्थान रखते थे। पुस्तक में आर्थिक सिद्धांतों, सामाजिक संबंधों और वर्गीय दृष्टिकोण का गहन विश्लेषण किया गया है, जो बाद में मार्क्सवादी चिंतन की आधारशिला बना।

यह कृति मार्क्सवादी दर्शन, राजनीतिक अर्थशास्त्र और समाजवादी विचारधारा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐतिहासिक संदर्भ और वैचारिक स्पष्टता के कारण यह पुस्तक मार्क्स के बौद्धिक विकास को समझने और उनके सिद्धांतों की पृष्ठभूमि जानने के लिए एक आवश्यक संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।