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विवेकानंद सामाजिक - राजनीतिक विचार

विवेकानंद सामाजिक - राजनीतिक विचार

Book Details

  • Author: विनोये के. राय

  • Edition: अगस्त 2018

  • Cover: Paperback

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक स्वामी विवेकानंद—जिनका मूल नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था—के जीवन, विचारों और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी विशिष्ट भूमिका पर केंद्रित एक विचारोत्तेजक अध्ययन प्रस्तुत करती है। समूचे विश्व में स्वामी विवेकानंद के नाम से प्रसिद्ध नरेन्द्रनाथ दत्त ने भारत की आध्यात्मिक और राष्ट्रीय चेतना को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

लेखक बताते हैं कि औपचारिक रूप से वे भगवा वस्त्र धारण करने वाले संन्यासी, धार्मिक उपदेशक और दार्शनिक थे, लेकिन उनकी भूमिका इससे कहीं व्यापक थी। वे एक ऐसे धार्मिक–सामाजिक आंदोलन के संस्थापक और संगठक थे, जिसे वेदांतवादी—या अधिक सटीक रूप में नव–वेदांतवादी—आंदोलन के नाम से जाना जाता है। इसी विचारधारा के आधार पर उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जिसने सेवा, शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण के कार्यों को संगठित रूप प्रदान किया।

यह कृति स्वामी विवेकानंद के विचारों को केवल धार्मिक संदर्भ में ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, राष्ट्रीय चेतना और आधुनिक भारत के निर्माण की प्रक्रिया से जोड़कर देखती है। इतिहास, दर्शन, भारतीय संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक मानी जाती है।



$0.24

Original: $0.80

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  • Author: विनोये के. राय

  • Edition: अगस्त 2018

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About the Book
यह पुस्तक स्वामी विवेकानंद—जिनका मूल नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था—के जीवन, विचारों और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी विशिष्ट भूमिका पर केंद्रित एक विचारोत्तेजक अध्ययन प्रस्तुत करती है। समूचे विश्व में स्वामी विवेकानंद के नाम से प्रसिद्ध नरेन्द्रनाथ दत्त ने भारत की आध्यात्मिक और राष्ट्रीय चेतना को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

लेखक बताते हैं कि औपचारिक रूप से वे भगवा वस्त्र धारण करने वाले संन्यासी, धार्मिक उपदेशक और दार्शनिक थे, लेकिन उनकी भूमिका इससे कहीं व्यापक थी। वे एक ऐसे धार्मिक–सामाजिक आंदोलन के संस्थापक और संगठक थे, जिसे वेदांतवादी—या अधिक सटीक रूप में नव–वेदांतवादी—आंदोलन के नाम से जाना जाता है। इसी विचारधारा के आधार पर उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की, जिसने सेवा, शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण के कार्यों को संगठित रूप प्रदान किया।

यह कृति स्वामी विवेकानंद के विचारों को केवल धार्मिक संदर्भ में ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, राष्ट्रीय चेतना और आधुनिक भारत के निर्माण की प्रक्रिया से जोड़कर देखती है। इतिहास, दर्शन, भारतीय संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक मानी जाती है।